BRICS Summit 2026 New Delhi tech AI critical minerals चर्चा
टेक ज्ञान - AI

BRICS Summit 2026: Tech, AI aur Critical Minerals पर क्या तय हुआ, और आपके लिए इसका क्या मतलब है

BRICS Summit 2026 अभी अभी New Delhi में खत्म हुआ है, और अगर आपने न्यूज़ में सिर्फ हेडलाइन्स सरसरी नज़र से पढ़ीं हैं तो शायद आपको लग रहा होगा कि ये सिर्फ बड़े-बड़े नेताओं की एक और फोटो-ऑप वाली मीटिंग थी। लेकिन सच कहूँ तो, इस बार बातचीत का केंद्र टेक्नोलॉजी, AI aur critical minerals रहा, और ये तीनों चीज़ें सीधे तौर पर आपकी नौकरी, आपकी पढ़ाई और आपके फोन-लैपटॉप की कीमत तक को छू सकती हैं।

दो दिन तक चले इस Summit में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत BRICS देशों के नेता जुटे। इस लेख में हम इसे बिल्कुल आसान भाषा में तोड़कर समझेंगे, बिना किसी diplomatic जार्गन के, और साथ ही ये भी देखेंगे कि एक student या young professional के तौर पर आपके लिए इसमें असल में क्या काम की बात है।


BRICS Summit 2026 में हुआ क्या, एक नज़र में

New Delhi के भारत मंडपम में हुए इस 18वें BRICS Summit में सदस्य देशों ने technology, trade, health aur supply chains जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में साफ कहा कि टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स का हथियार बनाना साझा प्रगति को नुकसान पहुंचा सकता है, और टेक्नोलॉजी तक सबकी पहुंच होनी चाहिए।

अब यहाँ एक बात ध्यान देने वाली है, ये कोई random comment नहीं था। उनकी ये टिप्पणी उस समय आई जब दुनिया भर में चीन की क्रिटिकल मिनरल एक्सपोर्ट पॉलिसी को लेकर चिंता बढ़ रही है। यानी सीधे शब्दों में कहें तो, ये इशारा था कि कोई भी देश अगर टेक्नोलॉजी या मिनरल्स की सप्लाई को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल करे, तो वो पूरी दुनिया के विकास के लिए ठीक नहीं है।

यह जानना दिलचस्प है कि BRICS अब सिर्फ पांच देशों का समूह नहीं रहा, ये 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह बन चुका है, जो दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी और लगभग 40 प्रतिशत ग्लोबल GDP का प्रतिनिधित्व करता है। तो जब इतने बड़े समूह के नेता टेक्नोलॉजी और मिनरल्स पर एक साथ बात करते हैं, तो असर सिर्फ diplomacy तक सीमित नहीं रहता, ये सीधे global supply chains और job markets तक पहुंचता है।


Technology Weaponisation: ये टर्म आखिर मतलब क्या है

अब "weaponisation of technology" सुनने में भारी-भरकम लगता है, लेकिन इसे समझना उतना मुश्किल नहीं है। सीधी भाषा में, इसका मतलब है कि कोई देश टेक्नोलॉजी, चिप्स, सॉफ्टवेयर या जरूरी मिनरल्स की सप्लाई को रोककर या पाबंदी लगाकर दूसरे देशों पर दबाव बनाए।

मोदी ने अपने भाषण में यह भी बताया कि क्रिटिकल मिनरल्स आज की टेक्नोलॉजी के लिए, खासकर renewable energy aur advanced electronics बनाने के लिए, कितने ज़रूरी हैं। सोचिए, आपका स्मार्टफोन, आपकी EV बाइक की बैटरी, सोलर पैनल, ये सब कुछ न कुछ rare earth elements aur specialty minerals पर निर्भर करता है। अगर इनकी सप्लाई किसी एक देश के हाथ में केंद्रित हो जाए, और वो देश उसे राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने लगे, तो बाकी दुनिया की मैन्युफैक्चरिंग रुक सकती है।

यहाँ context समझना ज़रूरी है। नवंबर 2025 में चीन ने कुछ rare earth elements पर एक्सपोर्ट कंट्रोल कड़े कर दिए थे, यह कहते हुए कि ये national security के लिए ज़रूरी है। भारत का इससे सीधा वास्ता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए भारत 75 प्रतिशत से ज़्यादा और लैपटॉप, सोलर पैनल, EV बैटरियों के लिए 80 प्रतिशत से ज़्यादा चीन पर निर्भर है। यानी अगर ये सप्लाई अचानक रुक जाए, तो भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स और EV इंडस्ट्री सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है।

International Energy Agency (IEA) की एक रिपोर्ट भी इस चिंता को और पुख्ता करती है। IEA के मुताबिक अगर चीन की ये पाबंदियां पूरी तरह लागू हो जाएं, तो चीन के बाहर हर साल लगभग 6.5 ट्रिलियन डॉलर की downstream production खतरे में पड़ सकती है। ये आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसे समझने के लिए बस इतना काफी है कि automotive, high-tech, defense aur energy, लगभग हर बड़ा सेक्टर इससे जुड़ा है।


Open-Source AI Ecosystem: चीन का बड़ा ऑफर

Summit के दौरान एक और बड़ी बात सामने आई, और वो थी open-source AI को लेकर। चीन ने BRICS देशों के लिए एक open-source AI ecosystem बनाने की बड़ी पहल की घोषणा की, और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उभरते बाज़ारों aur Global South के साथ मिलकर सप्लाई चेन को मज़बूत करने का आह्वान किया।

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दिलचस्प बात ये है कि शी जिनपिंग ने अपने भाषण में open-source AI aur smart manufacturing को उन पांच मुख्य पहलों में गिनाया जो Global South में आर्थिक विकास aur तकनीकी प्रगति को आगे बढ़ाएंगी। यानी चीन खुद को Global South की AI ज़रूरतों के लिए एक भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर पेश कर रहा है।

लेकिन यहाँ एक twist भी है। जहां एक तरफ दो दिन की diplomacy ने अमेरिकी टैरिफ, sanctions aur "America first" प्रेशर के खिलाफ एक joint declaration के ज़रिए एकजुटता दिखाई, वहीं दूसरी तरफ मिनरल्स aur टेक्नोलॉजी को लेकर चिंताओं ने इस एकजुटता की सीमाएं भी उजागर कर दीं। यानी BRICS देश बाहरी दबाव के खिलाफ तो साथ खड़े दिखे, पर अंदरखाने technology dependence को लेकर हर देश अपनी चिंता भी ज़ाहिर कर रहा था।

अब यहाँ एक बात और जोड़नी ज़रूरी है। BRICS Summit से कुछ महीने पहले, फरवरी 2026 में, भारत ने ही New Delhi में AI Impact Summit होस्ट किया था। इस समिट के बाद 88 देशों aur अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने New Delhi Declaration on AI को अपनाया था, जिसमें अमेरिका, रूस, चीन, दक्षिण कोरिया aur UK जैसे देश शामिल थे। इस डिक्लेरेशन में AI resources को democratize करने, secure aur trusted AI सिस्टम बनाने, aur research व innovation के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने पर ज़ोर दिया गया। तो BRICS का open-source AI initiative असल में उसी बड़ी सोच को आगे बढ़ाने जैसा है, जहां भारत पहले से ही एक अहम आवाज़ बन चुका है।

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New Delhi Declaration: क्या-क्या तय हुआ

Summit के आखिर में BRICS देशों ने New Delhi Declaration को सर्वसम्मति से अपनाया। इस डिक्लेरेशन में global governance, trade, technology, climate aur development से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को शामिल किया गया, इसमें आतंकवाद की निंदा की गई, वेस्ट एशिया में बातचीत की अपील की गई, aur एक common BRICS currency की जगह अपनी-अपनी national currencies के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया गया।

इसके अलावा रूस की तरफ से भी दो दिलचस्प प्रस्ताव आए। राष्ट्रपति पुतिन ने एक नए insurance mechanism aur एक collaborative grain market पहल का सुझाव दिया। जबकि भारत ने health सेक्टर में भी एक बड़ा कदम उठाया। इसमें infectious diseases के लिए एक integrated BRICS early warning system बनाने की घोषणा भी शामिल थी।

भारत के लिए तकनीकी पहलू पर एक और बड़ी बात रही। इस डॉक्यूमेंट में भारत के फरवरी 2026 वाले AI Impact Summit की मेज़बानी को हाइलाइट किया गया, एक BRICS Startup Innovation Fund प्रस्तावित किया गया, aur भारत के GIFT City फाइनेंशियल हब के लिए एक Risk Lab का स्वागत किया गया। यानी भारत सिर्फ बातचीत की मेज़बानी नहीं कर रहा, बल्कि BRICS की टेक्नोलॉजी एजेंडा में खुद को एक central player के तौर पर स्थापित कर रहा है।

इंडस्ट्री का नज़रिया भी इसी दिशा में इशारा करता है। India Electronics and Semiconductor Association (IESA) के अध्यक्ष अशोक चंडक ने कहा कि BRICS ने resilient technology supply chains, semiconductors, critical minerals aur frontier technologies की अहमियत को फिर से रेखांकित किया है। उन्होंने आगे कहा कि इसके तुरंत बाद होने वाला SEMICON India 2026 इवेंट इस strategic vision को industry partnerships aur investments में बदलने का मंच बनेगा


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Critical Minerals का Deep Dive: आखिर माजरा क्या है

अगर आपने कभी सोचा हो कि "critical minerals" शब्द बार-बार न्यूज़ में क्यों आ रहा है, तो जवाब सीधा है, ये वो elements हैं जिनके बिना आज की ज़्यादातर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी बन ही नहीं सकती। इनमें rare earth elements, lithium, cobalt, nickel, graphite जैसी चीज़ें शामिल हैं।

चीन का इस मामले में लगभग एकाधिकार जैसा है, aur यही चिंता की असली जड़ है। नवंबर 2025 में चीन ने सात rare earth elements पर एक्सपोर्ट कंट्रोल्स लगाए, इसकी वजह नेशनल सिक्योरिटी, सप्लाई चेन प्रोटेक्शन aur non-proliferation से जुड़ी चिंताओं को बताया गया। इस कदम ने दुनिया भर में चीन के rare earth supply chain पर लगभग एकाधिकार को लेकर पुरानी चिंताओं को फिर से हवा दे दी।

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अच्छी बात ये है कि दुनिया इस पर action ले रही है। जापान ने 2010 में चीन पर अपनी 90 प्रतिशत निर्भरता को 2023 तक घटाकर 60 प्रतिशत कर लिया, ऑस्ट्रेलिया के प्रोजेक्ट्स में निवेश करके। वहीं अमेरिका ने Mineral Security Partnership के तहत घरेलू उत्पादन को फिर से शुरू किया है।

भारत भी पीछे नहीं है। भारत ने KABIL (Khanij Bidesh India Ltd.) के ज़रिए अर्जेंटीना में पांच लिथियम ब्लॉक्स हासिल किए हैं, ओडिशा aur केरल में नई rare earth exploration शुरू की है, aur जापान, ऑस्ट्रेलिया व अमेरिका के साथ संभावित refining tie-ups पर काम कर रहा है। लेकिन रिपोर्ट यह भी साफ कहती है कि भारत को processing capacity aur regulatory efficiency दोनों में सुधार करना होगा, वरना वो सिर्फ raw material exporter बनकर रह जाएगा।

सरकार ने इसी सोच के साथ National Critical Mineral Mission शुरू की है। यह मिशन वित्त वर्ष 2024-25 से 2030-31 तक चलेगा, जिसमें करीब 16,300 करोड़ रुपये का सरकारी खर्च तय किया गया है, aur सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से लगभग 18,000 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है। इसका लक्ष्य 2030-31 तक 1,200 domestic exploration projects पूरे करना aur कम से कम 15 critical minerals का घरेलू उत्पादन सुनिश्चित करना है।


Students aur Professionals के लिए इसका असली मतलब क्या है

अब बात करते हैं उस हिस्से की, जो शायद आपके लिए सबसे ज़्यादा काम की है। इतनी बड़ी diplomacy और geopolitics के पीछे, असल में एक बहुत ठोस economic opportunity भी छुपी है, खासकर उन students aur young professionals के लिए जो सही समय पर सही स्किल्स सीख लें।

Semiconductor aur electronics में करियर: भारत का सेमीकंडक्टर सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहा है, aur इसके पीछे यही सप्लाई चेन की चिंता एक बड़ी वजह है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग विभिन्न सेक्टरों में करीब दस लाख नौकरियों की मांग पैदा करने की उम्मीद रखता है, जिसमें चिप फैब्रिकेशन में तीन लाख aur ATMP (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग, पैकेजिंग) में करीब दो लाख भूमिकाएं शामिल हैं। इसके अलावा चिप डिज़ाइन, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, सिस्टम सर्किट्स aur मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन मैनेजमेंट में भी अवसर खुलने की उम्मीद है।

एक बात यहाँ ध्यान देने वाली है, ये सिर्फ इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए नहीं है। इस टैलेंट पाइपलाइन को तैयार करने के लिए इंजीनियर्स, ऑपरेटर्स, टेक्नीशियन्स के साथ-साथ क्वालिटी कंट्रोल, प्रोक्योरमेंट aur मैटेरियल्स इंजीनियरिंग जैसे स्पेशलिस्ट रोल्स की भी ज़रूरत होगी।

Reskilling aur upskilling का महत्व: सिर्फ नई नौकरियां ही नहीं, मौजूदा वर्कफोर्स को भी अपडेट रहना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक हर साल करीब पांच लाख लोगों की reskilling aur upskilling ज़रूरी होगी। अगर आप पहले से किसी टेक्निकल फील्ड में हैं, तो ये एक संकेत है कि AI, मैटेरियल्स साइंस या मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े शॉर्ट कोर्सेज़ करना आपके करियर को आगे बढ़ा सकता है।

AI aur governance में भूमिका: दूसरी तरफ, AI Impact Summit की New Delhi Declaration ने भी साफ किया है कि सिर्फ टेक्निकल स्किल्स ही नहीं, AI policy, ethics aur governance जैसे फील्ड्स में भी मौके बढ़ेंगे। डिक्लेरेशन के सात मुख्य स्तंभों में human capital development aur social empowerment के लिए access जैसे पहलू भी शामिल हैं। यानी अगर आप policy, कम्युनिकेशन या पब्लिक अफेयर्स बैकग्राउंड से हैं, तो AI governance aur digital policy भी एक उभरता हुआ करियर पाथ हो सकता है।

Critical minerals और maining sector: ये फील्ड शायद पहली नज़र में उतना ग्लैमरस न लगे, लेकिन geology, mining engineering aur materials science में बैकग्राउंड रखने वालों के लिए National Critical Mineral Mission एक बड़ा मौका है, क्योंकि government aur PSUs दोनों इसमें भारी निवेश कर रहे हैं।

असल में सोचें तो, ये चारों क्षेत्र, semiconductors, AI, mining aur governance, आपस में जुड़े हुए हैं। कोई एक स्किल सीखकर आप सिर्फ एक दरवाज़ा नहीं खोलते, बल्कि पूरे इकोसिस्टम से जुड़ जाते हैं।


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भारत की Global Positioning: क्यों ये सिर्फ diplomacy नहीं है

यहाँ एक बात समझनी ज़रूरी है, भारत सिर्फ मेज़बान देश बनकर नहीं रह गया। Summit को चेयर करते हुए BRICS देशों ने AI, स्टार्टअप्स aur फाइनेंशियल इनोवेशन को लेकर एक bloc-wide approach को औपचारिक रूप दिया, aur इसमें भारत की tech ambitions को शेप करने में केंद्रीय भूमिका साफ झलकती है।

IESA अध्यक्ष अशोक चंडक के मुताबिक भारत के पास खुद को Global South के लिए एक trusted technology bridge aur design engine के तौर पर स्थापित करने का एक अनोखा मौका है। ये सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि एक संकेत है कि आने वाले सालों में भारत की कंपनियां, स्टार्टअप्स aur institutions, दूसरे BRICS देशों के साथ मिलकर काम करने के मौके पाएंगी। अगर आप entrepreneurship या इंटरनेशनल बिज़नेस में रुचि रखते हैं, तो ये ट्रेंड नोट करने लायक है।


तो अब आगे क्या

सच कहें तो, BRICS Summit 2026 सिर्फ एक और diplomatic event नहीं था। ये तीन चीज़ों को साफ करता है, पहला, टेक्नोलॉजी aur मिनरल्स को हथियार बनाने की चिंता अब सिर्फ थ्योरी नहीं रह गई, ये असल पॉलिसी बहस का हिस्सा बन चुकी है। दूसरा, AI को लेकर देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है, चाहे वो open-source ecosystem हो या New Delhi Declaration जैसी frameworks। और तीसरा, भारत खुद को इस पूरी कहानी के केंद्र में ला रहा है, चाहे वो सेमीकंडक्टर मिशन हो, क्रिटिकल मिनरल मिशन हो या AI गवर्नेंस।

एक student या young professional के लिए इसका मतलब यह नहीं कि आपको कल ही अपना करियर पूरी तरह बदल देना है। लेकिन इतना ज़रूर है कि semiconductors, AI, critical minerals aur governance से जुड़े स्किल्स सीखना अब सिर्फ "अच्छा आइडिया" नहीं, बल्कि एक strategic बेट है, क्योंकि सरकार, इंडस्ट्री aur ग्लोबल पार्टनरशिप्स, तीनों इसी दिशा में निवेश कर रहे हैं।

यह सबके लिए अलग हो सकता है कि कौन सा रास्ता सही बैठे, पर एक बात तय है, अगली बार जब आप न्यूज़ में BRICS, critical minerals या open-source AI के बारे में सुनें, तो अब आप जानते हैं कि इसका आपके करियर से क्या कनेक्शन हो सकता है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. BRICS Summit 2026 कहाँ हुआ और इसमें कौन-कौन शामिल था?

BRICS Summit 2026 का 18वां संस्करण भारत में New Delhi के भारत मंडपम में हुआ। इसमें भारत, चीन, रूस समेत सभी 11 BRICS सदस्य देशों के नेताओं ने हिस्सा लिया, aur इसे भारत ने होस्ट किया।

Q2. "Weaponisation of technology" का मतलब क्या है?

इसका मतलब है किसी देश द्वारा टेक्नोलॉजी, चिप्स या ज़रूरी मिनरल्स की सप्लाई को रोककर या पाबंदी लगाकर दूसरे देशों पर दबाव बनाना। प्रधानमंत्री मोदी ने Summit में इसके खिलाफ चेतावनी दी थी।


Q3. Critical minerals क्या होते हैं और ये इतने ज़रूरी क्यों हैं?

Critical minerals में rare earth elements, lithium, cobalt, nickel aur graphite जैसे elements शामिल हैं, जो स्मार्टफोन, EV बैटरी, सोलर पैनल aur डिफेंस टेक्नोलॉजी बनाने के लिए ज़रूरी होते हैं। इनकी सप्लाई कुछ ही देशों तक सीमित होने की वजह से ये geopolitically अहम बन गए हैं।


Q4. चीन के rare earth export restrictions का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए 75 प्रतिशत से ज़्यादा aur लैपटॉप, सोलर पैनल, EV बैटरियों के लिए 80 प्रतिशत से ज़्यादा चीन पर निर्भर है, इसलिए किसी भी restriction का सीधा असर इन इंडस्ट्रीज़ पर पड़ सकता है।


Q5. BRICS का open-source AI ecosystem initiative क्या है?

यह चीन द्वारा प्रस्तावित एक पहल है जिसके तहत BRICS देश मिलकर एक open-source AI ecosystem बनाएंगे, ताकि Global South के देशों को भी advanced AI टूल्स तक किफायती पहुंच मिल सके।


Q6. Students इस पूरी खबर से practically क्या सीख सकते हैं?

Semiconductors, AI, critical minerals mining aur AI governance, ये चारों फील्ड्स आने वाले सालों में तेज़ी से बढ़ने वाले हैं। इंजीनियरिंग, geology, policy या मैनेजमेंट बैकग्राउंड वाले students इनमें से किसी भी दिशा में स्किल्स डेवलप कर सकते हैं।


Q7. भारत का National Critical Mineral Mission क्या है?

यह भारत सरकार की एक योजना है जिसका मकसद critical minerals के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाना है। इसमें एक्सप्लोरेशन से लेकर प्रोसेसिंग तक पूरी वैल्यू चेन को कवर किया गया है, aur सरकार ने इसके लिए हज़ारों करोड़ रुपये का बजट तय किया है।


Q8. क्या BRICS देश अब अपनी एक common currency लाने वाले हैं?

नहीं, New Delhi Declaration में साफ किया गया कि BRICS देश फिलहाल एक common currency की बजाय अपनी-अपनी national currencies के इस्तेमाल पर ज़ोर दे रहे हैं।


निष्कर्ष (Conclusion)

BRICS Summit 2026 ने एक बात बिल्कुल साफ कर दी है, आने वाले सालों की सबसे बड़ी geopolitical बहस टेक्नोलॉजी aur critical minerals के इर्द-गिर्द ही घूमेगी। भारत के लिए ये सिर्फ diplomacy का मामला नहीं, बल्कि semiconductors, AI aur mining में नए करियर पाथ्स बनाने का मौका भी है। अगर आप student हैं या करियर बदलने की सोच रहे हैं, तो अभी से National Critical Mineral Mission, India Semiconductor Mission aur AI governance से जुड़ी updates फॉलो करना शुरू करें, ताकि जब मौका आए, आप तैयार हों।