मदर टेरेसा एक अल्बानियाई-भारतीय कैथोलिक नन और मानव सेवा के लिए प्रसिद्ध व्यक्तित्व थीं। उनका जन्म 26 अगस्त 1910 को स्कोप्जे में हुआ था, जो आज उत्तरी मैसेडोनिया में है। उनका मूल नाम अंजेज़े गोंक्सहे बोजाक्सीहु था। उन्होंने भारत के कोलकाता में गरीब, बीमार, अनाथ और जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
मदर टेरेसा ने 1950 में मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की स्थापना की। उन्हें 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार और 1980 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनका निधन 5 सितंबर 1997 को कोलकाता में हुआ। 2016 में कैथोलिक चर्च ने उन्हें “सेंट टेरेसा ऑफ कलकत्ता” घोषित किया।
मदर टेरेसा से जुड़ी मुख्य जानकारी
पूरा नाम: अंजेज़े गोंक्सहे बोजाक्सीहु
प्रसिद्ध नाम: मदर टेरेसा
जन्म: 26 अगस्त 1910
जन्म स्थान: स्कोप्जे, उत्तरी मैसेडोनिया
राष्ट्रीयता: अल्बानियाई-भारतीय
प्रमुख पहचान: कैथोलिक नन, समाजसेवी, मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की संस्थापक
नोबेल पुरस्कार: नोबेल शांति पुरस्कार, 1979
भारत रत्न: 1980
निधन: 5 सितंबर 1997, कोलकाता
संत की उपाधि: 2016 में सेंट टेरेसा ऑफ कलकत्ता
मदर टेरेसा का जन्म और प्रारंभिक जीवन
मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को स्कोप्जे में एक अल्बानियाई परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम अंजेज़े गोंक्सहे बोजाक्सीहु था। उनके पिता का नाम निकोले बोजाक्सीहु और माता का नाम ड्रानाफाइल बोजाक्सीहु था। बचपन से ही उनके मन में धार्मिक जीवन और मानव सेवा के प्रति गहरी रुचि थी।
कहा जाता है कि बहुत कम उम्र से ही वे मिशनरी कार्यों से प्रेरित थीं। 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना घर छोड़ा और आयरलैंड जाकर सिस्टर्स ऑफ लोरेटो से जुड़ गईं। इसके बाद वे भारत आईं और कोलकाता में शिक्षा तथा सेवा कार्यों से जुड़ गईं।
मदर टेरेसा भारत कब आईं?
मदर टेरेसा 1929 में भारत आईं। शुरुआत में उन्होंने कोलकाता के एक स्कूल में अध्यापन कार्य किया। लगभग 20 वर्षों तक उन्होंने शिक्षिका के रूप में काम किया और बाद में स्कूल की प्रधानाध्यापिका भी बनीं।
कोलकाता में रहते हुए उन्होंने गरीबी, बीमारी और असहाय लोगों की पीड़ा को करीब से देखा। यही अनुभव आगे चलकर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
गरीबों की सेवा का संकल्प
1946 में दार्जिलिंग की यात्रा के दौरान मदर टेरेसा को एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव हुआ। उन्होंने इसे “the call within the call” कहा। इसके बाद उन्होंने कॉन्वेंट छोड़कर गरीबों, बीमारों और जरूरतमंद लोगों की सीधी सेवा करने का निर्णय लिया।
1948 में उन्होंने कोलकाता की झुग्गियों में सेवा कार्य शुरू किया। उन्होंने साधारण सफेद साड़ी पहनी, जिसके किनारे नीले रंग के थे। यही साड़ी आगे चलकर मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की पहचान बन गई।
मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की स्थापना
मदर टेरेसा ने 1950 में मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की स्थापना की। इस संस्था का उद्देश्य गरीब, बीमार, अनाथ, बेघर, कुष्ठ रोगियों और समाज द्वारा उपेक्षित लोगों की सेवा करना था।
मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी ने धीरे-धीरे भारत के साथ-साथ कई देशों में अपने सेवा कार्यों का विस्तार किया। संस्था ने अनाथालय, स्कूल, क्लीनिक, वृद्धाश्रम, कुष्ठ रोगियों के लिए सहायता केंद्र और मृत्यु के निकट लोगों के लिए सेवा गृह स्थापित किए।
मदर टेरेसा का मानना था कि हर व्यक्ति को सम्मान, प्रेम और देखभाल के साथ जीने और मरने का अधिकार है। इसी सोच के कारण वे दुनिया भर में करुणा और मानव सेवा का प्रतीक बनीं।
मदर टेरेसा के प्रमुख सेवा कार्य
- गरीब और बेघर लोगों की सेवा
- बीमार और असहाय लोगों की देखभाल
- अनाथ बच्चों के लिए आश्रय और सहायता
- कुष्ठ रोगियों के लिए सेवा केंद्र
- मृत्यु के निकट लोगों के लिए देखभाल गृह
- शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े सेवा कार्य
- मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी के माध्यम से विश्व स्तर पर सेवा
मदर टेरेसा को नोबेल पुरस्कार कब मिला?
मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला। यह सम्मान उन्हें गरीबों, बीमारों और समाज के सबसे कमजोर लोगों की सेवा के लिए दिया गया। उन्होंने पुरस्कार राशि को गरीबों की सेवा में लगाने की बात कही।
नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद मदर टेरेसा का नाम पूरी दुनिया में और अधिक प्रसिद्ध हुआ। वे केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर मानव सेवा की प्रतीक बन गईं।
मदर टेरेसा को मिले प्रमुख पुरस्कार और सम्मान
- 1962: पद्म श्री
- 1962: रेमन मैग्सेसे पुरस्कार
- 1971: पोप जॉन XXIII शांति पुरस्कार
- 1979: नोबेल शांति पुरस्कार
- 1980: भारत रत्न
- 2016: सेंट टेरेसा ऑफ कलकत्ता की उपाधि
मदर टेरेसा के विचार
मदर टेरेसा के विचार प्रेम, करुणा, सेवा और मानवता पर आधारित थे। उनके कुछ प्रसिद्ध विचार इस प्रकार हैं:
- हम सभी महान कार्य नहीं कर सकते, लेकिन छोटे कार्य बड़े प्रेम से कर सकते हैं।
- शांति की शुरुआत मुस्कान से होती है।
- अकेलापन और अवांछित महसूस करना सबसे बड़ी गरीबी है।
- प्रेम की भूख रोटी की भूख से कहीं अधिक कठिन होती है।
- आप जहां भी जाएं, प्रेम फैलाएं।
मदर टेरेसा की मृत्यु
मदर टेरेसा का निधन 5 सितंबर 1997 को कोलकाता में हुआ। उनकी मृत्यु के समय उनकी उम्र 87 वर्ष थी। उनके निधन के बाद भारत सहित पूरी दुनिया में शोक व्यक्त किया गया।
उनकी पुण्यतिथि 5 सितंबर को मनाई जाती है। इसी दिन अंतर्राष्ट्रीय चैरिटी दिवस भी मनाया जाता है, ताकि लोगों को दान, सेवा और मानवता के कार्यों के लिए प्रेरित किया जा सके।
मदर टेरेसा को संत की उपाधि
मदर टेरेसा को 2016 में कैथोलिक चर्च द्वारा संत घोषित किया गया। इसके बाद उन्हें “सेंट टेरेसा ऑफ कलकत्ता” के नाम से जाना जाने लगा। यह सम्मान उनके जीवन भर किए गए सेवा कार्यों और मानवता के प्रति समर्पण के कारण दिया गया।
मदर टेरेसा का जीवन हमें क्या सिखाता है?
मदर टेरेसा का जीवन हमें सिखाता है कि सेवा, करुणा और प्रेम से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने अपना जीवन उन लोगों के लिए समर्पित किया जिन्हें समाज अक्सर अनदेखा कर देता है।
उनकी सबसे बड़ी पहचान यही रही कि उन्होंने गरीब, बीमार और असहाय लोगों में ईश्वर का रूप देखा। आज भी उनका जीवन दुनिया भर के लोगों को सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
मदर टेरेसा से जुड़े सामान्य प्रश्न
मदर टेरेसा कहां की रहने वाली थीं?
मदर टेरेसा का जन्म स्कोप्जे में हुआ था, जो आज उत्तरी मैसेडोनिया में है। उनका परिवार अल्बानियाई मूल का था। बाद में वे भारत आईं और उन्होंने अपना अधिकांश जीवन कोलकाता में सेवा कार्यों में बिताया।
मदर टेरेसा का पूरा नाम क्या था?
मदर टेरेसा का मूल नाम अंजेज़े गोंक्सहे बोजाक्सीहु था। बाद में वे मदर टेरेसा के नाम से प्रसिद्ध हुईं।
मदर टेरेसा का जन्म कब और कहां हुआ था?
मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को स्कोप्जे में हुआ था।
मदर टेरेसा भारत कब आई थीं?
मदर टेरेसा 1929 में भारत आईं और बाद में कोलकाता में गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा में लग गईं।
मदर टेरेसा ने किस संस्था की स्थापना की?
मदर टेरेसा ने 1950 में मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की स्थापना की। यह संस्था गरीबों, बीमारों, अनाथों और जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए जानी जाती है।
मदर टेरेसा को नोबेल पुरस्कार कब मिला था?
मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। यह सम्मान उन्हें गरीबों और पीड़ित लोगों की सेवा के लिए दिया गया।
मदर टेरेसा को भारत रत्न कब मिला था?
मदर टेरेसा को 1980 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
मदर टेरेसा की मृत्यु कब हुई?
मदर टेरेसा का निधन 5 सितंबर 1997 को कोलकाता में हुआ था।
मदर टेरेसा को संत कब घोषित किया गया?
मदर टेरेसा को 2016 में कैथोलिक चर्च द्वारा सेंट टेरेसा ऑफ कलकत्ता घोषित किया गया।





