Ozone Layer hole
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क्या लॉकडाउन के कारण भरने लगा है ओजोन छिद्र | Ozone Layer hole

पृथ्वी की सतह से करीब 30km की ऊंचाई पर ओजोन गैस की एक पतली परत पाई जाती है जिसे ओजोन लेयर कहते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीते कुछ महीनों में विश्वव्यापी कोरोना के संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिये दुनिया के हर देश ने लाकडाउन की घोषणा की थी।जिससे यह बात सामने आई कि ओजोन परत के लिए हानिकारक गैसों के उत्सर्जन में कमी के कारण ओजोन परत के 10 लाख वर्ग की परिधि में फैले छेद में कमी नजर आई है जो एक अस्थायी बदलाव है लेकिन अच्छा है।कोरोना वायरस का केंद्र चीन विश्व में सर्वाधिक प्रदूषित गैसों को उत्सर्जित करता है इस समय चीन में हुए लॉकडाउन  की वजह से जेट स्ट्रीम सही दिशा में जा रही है इसलिए ओजोन परत का घाव भर रहा है।


अपने इस लेख के माध्यम से आज हम आपको बताएंगे कि ओजोन लेयर क्या है?मानव जीवन में इसका क्या महत्व है ? तथा लॉकडाउन के चलते इस परत पर क्या प्रभाव देखने को मिले?


ओजोन परत क्या है?


वायुमंडल की एक ऐसी परत जिसमें ओजोन गैस की सघनता अपेक्षाकृत अधिक पायी जाती है जिसके कारण पृथ्वी पर जीवन सम्भव है ओजोन परत कहलाती है। यह परत सूर्य के उच्च आवृत्ति के पराबैंगनी किरणों को 93-99% मात्रा तक अवशोषित कर लेती है जो पृथ्वी पर जीवन के लिए हानिकारक है।यह मुख्यतः स्ट्रेटोस्फीयर के निचले भाग में पृथ्वी की सतह के ऊपर लगभग 10km से 50km की दूरी तक स्थित है।ओजोन एक गंधयुक्त गैस है जिसका रंग हल्का नीला होता है।ओजोन ऑक्सीजन का ही एक प्रकार है जिसे O3 के संकेत से प्रदर्शित करते हैं ऑक्सीजन के तीन परमाणु जब आपस में जुड़ते हैं तो ओजोन परत का निर्माण करते हैं।


ओजोन दिवस मनाया जाता है?


ओजोन परत के संरक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 19 दिसम्बर 1994 को एक बैठक की जिसमें प्रत्येक वर्ष 16 सितंबर को ओजोन दिवस मनाने की बात कही गई। पहली बार विश्व ओजोन दिवस 1995 में मनाया गया था।


मानव जीवन में इसका महत्व- ओजोन परत सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर इन्हें पृथ्वी तक पहुचने से रोकती है जिससे मनुष्य पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव को रोका जा सकता है।यद्यपि पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर पहुचती है तो इससे पेड़ पौधों से लेकर सम्पूर्ण मानव जाति को खतरा उत्पन्न हो सकता है। त्वचा कैंसर, अंधापन, जैसे भयंकर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इस परत के छिद्र को बड़ा होने से रोकने के प्रयास करें।


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ओजोन परत के लिए हानिकारक गैस


ओजोन परत के लिए  हानिकारक गैसों में CFC, Co2, co, c, No2 आदि मुख्य हैं। ये सभी गैसें सूर्य की किरणों के साथ रियेक्शन कर ओजोन प्रदूषक कणों का निर्माण करते हैं।


क्या लॉकडाउन के चलते ओजोन परत पर हुए छिद्र की भरपाई हुई?


जैसा कि हम जानते हैं कि कोरोना काल के चलते दुनिया के लगभग सभी देशों में लॉकडाउन पीरियड चल रहा था। फैक्टरीयां बंद थी, सड़कों पर ट्रैफिक नहीं था, प्रदूषण फैलाने वाली कोई भी गतिविधि नहीं हो रही थी जिसका सकारात्मक प्रभाव ओजोन परत पर देखने को मिला।

रिसर्च के मुताबिक पता चला है कि पृथ्वी के दक्षिणी हिस्से में स्थित अंटार्कटिका के ऊपर बने ओजोन परत का छेद अब भर रहा है क्योंकि चीन की तरफ़ से जाने वाला प्रदूषण अब उधर नहीं जा रहा था ।यद्यपि लॉक डाउन से पहले की बात की जाए तो प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा था। पृथ्वी के ऊपर चलने वाली जेट स्ट्रीम ओजोन परत में छेद की वजह से पृथ्वी के दक्षिणी हिस्से की तरफ़ जा रही थी लॉकडाउन की वजह से वह पलट गई और  ओजोन को छति नहीं पहुंचा पाई।


नासा के अनुसार ओजोन परत के नष्ट होने की मुख्य वजह ध्रुवीय संमतापमंडलीय बादल(पोलर स्ट्राटो स्फेरिक क्लाउड) होते हैं।ये 15000- 23000 मीटर की ऊँचाई के बीच होते हैं। इस वर्ष आर्कटिक के ऊपर वायुमंडल में मौसम का पैटर्न असामान्य रहा है और गर्म वातावरण में ध्रुवीय संतापमंडलीय बादल कम बनते हैं।और वे ओजोन परत को कम नुकसान पहुँचा पाते हैं। साथ में नासा के वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि छेद का सिकुड़ना दक्षिणी गोलार्ध में ओजोन के लिए काफी अच्छी खबर है।लेकिन उन्होंने यह भी बताया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि ओजोन परत में तेजी से सुधार हो रहा है छेद के सिकुड़ने की मुख्य वजह गर्म समतापमंडल का तापमान है।


Ozone Layer hole का मतलब है संक्रामक रोगों/ बीमारियों का खतरा ।इसलिए बीमारियों से बचने के लिए  ओजोन परत पर होने वाले छेद को बढ़ने से रोकें और इसका संरक्षण करें।


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