mental health issues post corona second wave
एजुकेशन

कोरोना के बाद अब एंग्जायटी, डिप्रेशन और साइकोसिस जैसी मानसिक समस्याएं

पिछले कुछ वक्त से लोग कोरोना संक्रमण के कारण वर्क फ्रॉम होम को तवज्जो दे रहे हैं। इसके साथ-साथ बच्चों की भी सभी प्रकार की शिक्षा ऑनलाइन तरीके से ही संपन्न हो रही है। ऐसे में कोरोनावायरस का डर लोगों के मन में बैठ गया है और इसका सीधा प्रभाव उनके दिमाग पर पड़ रहा है। इस वजह से कोरोना से संक्रमित होने के बाद भी लोगों में कई प्रकार के अन्य बीमारियां देखने को मिल रही हैं। इसके अलावा ऐसे लोग जिन्होंने कोरोना की इस लहर में अपने प्रिय जनों को खो दिया है उन लोगों में स्वास्थ्य को लेकर दिक्कतें पैदा हो रही हैं। इनमें डिप्रेशन, एंग्जाइटी और साइकोसिस जैसी कई समस्याएं अहम हैं। इस प्रकार की दिक्कतों से लोगों का अग्रेशन लेवल बढ़ रहा है। इसी तरह से स्ट्रेस लेवल के भी बढ़ने से कई अन्य समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। हालांकि पिछले दिनों के कई बुरे प्रभावों के कारण लोगों में डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी समस्या अधिक तेजी से फैल रही है। परंतु इस समस्या के निदान के भी उपाय मौजूद हैं। इसमें खान-पान में बदलाव से लेकर दिनचर्या में भी परिवर्तन करना आवश्यक हो गया है।


दूसरे की लहर के बाद अधिक हो रही हैं इस तरह की मानसिक समस्याएं


कई डॉक्टर समेत विशेषज्ञ भी मानते हैं कि कोरोना की पहली लहर के बाद आने वाली यह दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक साबित हुई है। फिर चाहे वह कोरोना से संक्रमित किसी व्यक्ति के लिए हो या फिर इसके इतर किसी दूसरी स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के लिए। जहां एक ओर कोरोना की पहली लहर के संक्रमण में 100 में से लगभग 5 से 6 मरीज  मानसिक परेशानियों से ग्रस्त थे वहीं अब दूसरी लहर के बाद 100 में से 15 से 20 मरीज ऐसे हैं जो रोजाना किसी न किसी मानसिक बीमारी के शिकार होते हैं। इनमें से अधिकतर लोगों में डिप्रेशन, एंग्जाइटी जैसी समस्या पाई जा रही है। इसके अलावा सोमेटाइजेशन की परेशानी भी कई लोगों को हो रही है। हालांकि ऐसे लोगों को काफी अधिक अच्छे ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है। क्योंकि ऐसे लोगों का इलाज करना एक चुनौती भरा कार्य होता है। ऐसे मानसिक समस्या से ग्रसित लोगों को काउंसलिंग के साथ-साथ हौसला और साहस देना भी आवश्यक होता है। इस तरह से देखा जाए तो अब डिप्रेशन, एंग्जायटी जैसी समस्याएं ही नहीं बल्कि साइकोसिस जैसी बड़ी परेशानी लोगों में अधिक देखने को मिल रही है।


इनसिक्योरिटी की भावना से बढ़ रही चिंता


कोरोना की दूसरी लहर के बाद अधिकतर लोगों में इनसिक्योरिटी की भावना जन्म ले रही है। दरअसल इंडियन साइक्रियाटिक सोसाइटी की तरफ से कोरोना की पहली लहर के बाद किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि इस महामारी के कारण लोगों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित कई नई समस्याएं उत्पन्न हुई हैं और ये सभी समस्याएं मानसिक रूप से व्यक्ति को प्रभावित करती हैं। वहीं अब दूसरी लहर आने के बाद का सर्वे अभी जारी है। इस दौरान ही यह बात निकलकर सामने आई है कि कोरोना के कारण लोग मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं। यहां तक कि मानसिक रोग विशेषज्ञ भी  बताते हैं की कोरोना के कारण लोग घर पर बैठने और घर के अंदर ही रहने को मजबूर हो गए हैं। इस वजह से कहीं ना कहीं उनके शरीर को शारीरिक रूप के साथ-साथ मानसिक रूप से भी प्रभाव पहुंचा है। इसलिए सभी डॉक्टर और विशेषज्ञ इस बात की जांच करने पर लगे हुए हैं कि आखिर किस कारण से और कैसे ये मानसिक समस्याएं लोगों में इतनी अधिक बढ़ रही हैं। इसके अलावा इस समय में डॉक्टर ऐसे लोगों की काउंसलिंग फोन पर ही कर रहे हैं। ताकि उनकी समस्या कोई बड़ा रूप धारण ना कर ले।


सोमेटाइजेशन है बड़ी प्रॉब्लम


आजकल अधिकतर लोगों में प्रमुख रूप से सोमेटाइजेशन कि समस्या हो रही है। इस परेशानी के दौरान व्यक्ति को मन में उलझन, शरीर में दर्द तथा ऐंठन जैसी परेशानियां अधिक होती हैं। ये सभी समस्याएं भी मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित होती हैं। ऐसे लोगों को जल्द से जल्द किसी मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास जाकर अपने स्वास्थ्य के बारे में बताना चाहिए। क्योंकि ऐसे मरीजों का ट्रीटमेंट करना काफी मुश्किल होता है। इसलिए इन मरीजों को जल्दी ट्रीट करना आवश्यक है। दरअसल इस प्रकार के इलाज में मरीजों की काफी लंबी काउंसलिंग करनी होती है। इससे मरीजों को भी काफी परेशानी हो सकती है। परंतु धैर्य और हौसले के साथ मरीजों तथा डॉक्टर को इस बीमारी का इलाज करना जरूरी है।

 

इस तरह से देखा जाए तो सबसे अधिक मरीज एंग्जायटी और डिप्रेशन के साथ-साथ साइकोसिस की समस्या से ग्रसित होते हैं। इस तरह के लोगों को अपने खाने में भी कुछ ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए जिससे दिमाग मजबूत होता है और शरीर को अंदर से खुशी मिलती है। कुछ ऐसी चीजें जिनसे शरीर में बनने वाले मोनोएमिक ऑक्साइड और स्ट्रेस जैसी समस्याएं कम होने लगे उन चीजों का सेवन अधिक करना चाहिए। इन में केला, केसर, अश्वगंधा आदि कुछ ऐसी चीजें हैं जो शरीर के हैप्पी हार्मोन को बढ़ाते हैं और इनसे विभिन्न प्रकार के मानसिक रोगों में भी लाभ मिलता है।