Is it Safe for Diabetics to Eat Mangoes
हेल्थ

डायबिटीज है और खाना चाहते है आम तो इन बातों का रखें ध्यान

आजकल के नाजुक दौर में छोटी से छोटी बीमारी भी बड़ा रूप ले लेती है और ऐसी कई बीमारियां हैं जो इंसान के शरीर को अपनी चपेट में ले लेने के बाद काफी खतरनाक साबित होती है। इन सभी बीमारियों के लिए डॉक्टर द्वारा कई सारे परहेज बताये जाते हैं। ऐसे ही कई सारे परहेज रखने वाली बीमारी है डायबिटीज यानी कि मधुमेह। जी हां! मधुमेह के रोगियों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी चीजों का सेवन बिल्कुल ना करें जो उनके शरीर में बनने वाले रक्त में ग्लूकोज या शर्करा की मात्रा बढ़ा दें। इसलिए उन्हें कई प्रकार के व्यंजन और खास तौर पर मीठी चीज से परहेज करना पड़ता है।

पूरी दुनिया के अधिकतर लोग हाइपरटेंशन और डायबिटीज की समस्या से ग्रसित हैं। डायबिटीज के रोगियों को खाने को लेकर कई तरह की सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। जैसे उन्हें चावल के सेवन, मिठाई के सेवन, आलू के सेवन से परहेज करना पड़ता है। इसके अलावा उन्हें मीठी चीजों को अपनी डाइट में बिल्कुल भी शामिल न करने की सलाह दी जाती है। परंतु आजकल गर्मियों का मौसम शुरू हो चुका है और इस मौसम में रसीले फल आम का जिक्र ना हो यह तो नामुमकिन है। ऐसी परिस्थिति में डायबिटीज के रोगियों के मन में एक सवाल हमेशा ही चलता रहता है कि क्या वे आम को खा सकते हैं। आइए इस लेख के माध्यम से मधुमेह के रोगियों के इस सवाल का जवाब जानने का प्रयास करते हैं।


आम है कई पोषक तत्वों से भरपूर


आम में कई प्रकार की चीजें मौजूद होती हैं। इनमें सभी आवश्यक विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं जो कि मनुष्य के शरीर में ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं।

आम में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। जिसमें जिंक, आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे जरूरी तत्व विद्यमान होते हैं।

इसके अलावा कहा जाता है कि एक कटोरी कटे हुए आमों में लगभग 99 कैलोरी, 1.4 ग्राम प्रोटीन, 22.5 ग्राम शुगर, 67 % विटामिन सी, 18% फोलेट, 10% विटामिन ए तथा 10%विटामिन ई के साथ-साथ 25 ग्राम कार्ब, 2.6ग्राम फाइबर भी पाया जाता है। ये सभी तत्व शरीर को कई बीमारियों से बचाने में सहायक होते हैं।


क्या है आम का ग्लाइसेमिक इंडेक्स


ग्लाइसेमिक इंडेक्स की रैंक से यह पता किया जाता है कि किसी भी फलया अन्य चीज को कोई डायबिटीज का रोगी खा सकता है या नहीं। क्योंकि ग्लाइसेमिक इंडेक्स के द्वारा किसी भी फल का रक्त के शर्करा पर पड़ने वाले प्रभाव को जाना जाता है। दरअसल ग्लाइसेमिक इंडेक्स को 0 से लेकर 100 तक की एक स्केल पर मापा जाता है। जिस भी चीज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स रैंक 55 से कम पर आता है, उसे इस स्केल के मुताबिक कम शुगर वाला कहा जाता है। कम शुगर वाली चीज होने के कारण इसे मधुमेह के रोगियों के लिए खाने योग्य माना जाता है। देखा जाए तो आम के ग्लाइसेमिक इंडेक्स स्केल की रैंक 51 है। इसका अर्थ यह है कि आम भी कम शुगर वाले फलों में शामिल होता है और डायबिटीज के रोगी इसका सेवन आसानी से कर सकते हैं।


आम खाने से ये होता है प्रभाव


कहा जाता है कि आम के सेवन से डायबिटीज के मरीजों को अधिक दिक्कत हो सकती है। क्योंकि इसे खाने से ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। दरअसल आम में 90% से अधिक की कैलोरी इस में पाई जाने वाली शुगर के कारण होती है। जिस कारण इसकी मिठास भी बनी रहती है। यदि डायबिटीज के मरीज इस का सेवन करते हैं तो इस वजह से उनका ब्लड शुगर का लेवल बढ़ जाता है। दूसरी ओर आम में उपस्थित एंटी ऑक्सीडेंट और फाइबर रक्त में पाए जाने वाले शुगर पर इसके प्रभाव को कम कर देते हैं। इसके अलावा आम में फाइबर भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो रक्त से शुगर को अवशोषित करने में कमी लाता है और इस वजह से शुगर को अवशोषित करने की दर भी धीमी हो जाती है। इसलिए डाइबटीज के मरीजों को आम का सेवन न करने की सलाह दी जाती है।


इन बातों का रखें ख्याल


आम के ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण हमें यह कह सकते हैं कि मधुमेह के रोगी बेहिचक होकर आम खा सकते हैं। परंतु उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि अलग-अलग व्यक्तियों के शरीर पर अलग-अलग तरह की चीजें विभिन्न प्रतिक्रियाओं को देती हैं। आम में कई हेल्थी फाइबर और कार्य होने के बाद भी इसके सेवन से नुकसान हो सकते हैं। इसलिए डायबिटीज के रोगियों को आम को नियंत्रित तरीके से खाना चाहिए। इसके अलावा यदि आम बेहद पसंद हो तो ही खाएं और इसे खाते समय सावधानी का ख्याल रखें कि कहीं इससे ब्लड शुगर ना बढ़ जाए।

डिस्क्लेमर: यह टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं, इन्हे किसी डॉक्टर या फिर स्वस्थ्य स्पेशलिस्ट की सलाह के तौर पर न लें, बिमारी या किसी संक्रमण की स्थिति में डॉक्टर की सलाह से ही अपना इलाज करवाएं।