जसवंत सिंह BJP नेता विदेश मंत्री जीवन परिचय
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जसवंत सिंह: जीवन परिचय, राजनीतिक सफर और ऐतिहासिक योगदान

भारतीय राजनीति में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो एक साथ सेना अधिकारी, कुशल राजनयिक, तीन अलग मंत्रालयों के मंत्री और एक संवेदनशील लेखक हों। जसवंत सिंह उन्हीं विरले व्यक्तित्वों में से एक थे।

BJP के संस्थापक सदस्यों में शुमार जसवंत सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में विदेश, रक्षा और वित्त तीनों मंत्रालय संभाले, जो राजस्थान के किसी भी नेता के लिए पहली बार था। उन्हें "वाजपेयी का हनुमान" कहा जाता था क्योंकि वे वाजपेयी के सबसे विश्वसनीय साथियों में से एक थे।

लेकिन उनका जीवन सिर्फ सफलताओं का किस्सा नहीं है। IC-814 कंधार अपहरण में उनकी भूमिका, जिन्ना पर लिखी किताब का विवाद और आखिर में BJP से निष्कासन, यह सब मिलकर एक ऐसे व्यक्तित्व की कहानी बनाते हैं जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

इस जसवंत सिंह जीवन परिचय में हम उनके जीवन के हर पहलू को विस्तार से जानेंगे।


संक्षिप्त जानकारी

विवरण

जानकारी

पूरा नाम

मेजर जसवंत सिंह

जन्म

3 जनवरी 1938

जन्म स्थान

जसोल गांव, बाड़मेर, राजस्थान

निधन

27 सितंबर 2020 (cardiac arrest)

आयु

82 वर्ष

पिता

ठाकुर सरदारा सिंह

पत्नी

शीतल कँवर

राजनीतिक दल

BJP (संस्थापक सदस्य)

प्रमुख पद

विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री

उपनाम

वाजपेयी का हनुमान, लिबरल डेमोक्रेट

प्रमुख रचनाएं

Jinnah: India-Partition-Independence, A Call to Honour


प्रारंभिक जीवन और परिवार

जसवंत सिंह का जन्म 3 जनवरी 1938 को राजस्थान के बाड़मेर जिले के जसोल गांव में हुआ था। उनके पिता ठाकुर सरदारा सिंह उस क्षेत्र के प्रमुख जमींदार थे।

जसवंत सिंह एक ऐसे परिवार से आते थे जहां राजपूत परंपरा और जमींदारी की गरिमा थी। बचपन से ही उन्हें घुड़सवारी, संगीत, किताबें और अपनी राजस्थानी संस्कृति से गहरा लगाव था। शायद यही कारण था कि वे बाद में एक अच्छे लेखक भी बने।

उनकी पत्नी का नाम शीतल कँवर था। उनके दो बेटे थे, जिनमें से मानवेंद्र सिंह बाद में खुद भी संसद सदस्य बने।


शिक्षा और सैन्य जीवन

जसवंत सिंह की शिक्षा राजस्थान और फिर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में हुई:

अजमेर का मेयो कॉलेज से स्कूली शिक्षा पूरी की। National Defence Academy (NDA), खड़कवासला से सैन्य प्रशिक्षण लिया।

1957 में उन्होंने भारतीय सेना में कमीशन लिया। वे Central India Horse रेजिमेंट में Captain के पद तक पहुंचे।

उनकी सैन्य सेवा के दौरान वे 1965 के भारत-पाक युद्ध और Sino-Indian संघर्ष में भी हिस्सेदार रहे।

1966 में, लगभग 10 साल की सैन्य सेवा के बाद, उन्होंने सेना से इस्तीफा दिया। उनके मन में देश की राजनीति और नीति-निर्माण में योगदान देने की इच्छा थी।


राजनीति में प्रवेश और संसदीय सफर

सेना छोड़ने के बाद जसवंत सिंह राजनीति में आए। उनके राजनीतिक गुरु थे राजस्थान के दिग्गज नेता भैरों सिंह शेखावत, जिन्हें वे अपना mentor मानते थे। पहले उन्होंने भारतीय जन संघ से जुड़े जो बाद में BJP बनी।

1980 में BJP की स्थापना के समय जसवंत सिंह इसके संस्थापक सदस्य थे। उसी साल वे पहली बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए।

संसदीय करियर की timeline:

राज्यसभा के लिए निर्वाचित: 1980, 1986, 1998, 1999, 2004 (पांच बार)

लोकसभा के लिए निर्वाचित: 1990, 1991, 1996, 2009 (चार बार)

2001: उन्हें प्रतिष्ठित Outstanding Parliamentarian Award से सम्मानित किया गया।

2004 से 2009 तक वे राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे।

Wikipedia के अनुसार, जसवंत सिंह India के सबसे लंबे समय तक सेवारत संसद सदस्यों में से एक थे, क्योंकि 1980 से 2014 तक वे लगभग लगातार Lok Sabha या Rajya Sabha के सदस्य रहे।


वाजपेयी सरकार में तीन मंत्रालय: ऐतिहासिक उपलब्धि

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में BJP सरकार में जसवंत सिंह ने जो भूमिका निभाई, वह भारतीय राजनीति में दुर्लभ है। वे राजस्थान के पहले और एकमात्र नेता बने जिन्होंने विदेश, रक्षा और वित्त तीनों मंत्रालय संभाले।

1996 (मई-जून): जब वाजपेयी की पहली सरकार केवल 13 दिन चली, उसमें जसवंत सिंह वित्त मंत्री थे।

1998-2002: विदेश मंत्री (External Affairs Minister)

यह उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण और challenging दौर था।

1998 के Pokhran-II परमाणु परीक्षण के बाद जब America ने India पर कड़े प्रतिबंध लगाए, तब जसवंत सिंह ने US के Deputy Secretary of State Strobe Talbott के साथ एक लंबी diplomatic dialogue शुरू की। यह वार्ता "Singh-Talbott Talks" के नाम से इतिहास में दर्ज है। इन वार्ताओं ने India-US संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य किया और 2000 में US President Bill Clinton की India यात्रा का रास्ता खुला।

1999 में Lahore Bus Yatra को आगे बढ़ाने में भी जसवंत सिंह की अहम भूमिका रही। Pakistan से रिश्ते सुधारने के लिए उनका यह कदम diplomatic इतिहास का हिस्सा है।

1999 के Kargil War के दौरान विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने international community में India का पक्ष मजबूती से रखा।

2000-2001: रक्षा मंत्री (Defence Minister)

2002-2004: वित्त मंत्री (Finance Minister)

वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने Vajpayee सरकार की market-friendly reforms को define और implement करने में केंद्रीय भूमिका निभाई।

जसवंत सिंह अटल बिहारी वाजपेयी Vajpayee Hanuman BJP

The Print के अनुसार, Strobe Talbott ने खुद जसवंत सिंह की diplomacy और negotiation skills की सराहना की थी।


IC-814 कंधार अपहरण: सबसे विवादास्पद फैसला

24 दिसंबर 1999 को Indian Airlines का flight IC-814 काठमांडू से दिल्ली जा रहा था। Harkat-ul-Mujahideen के 5 आतंकवादियों ने इसे हाईजैक कर लिया। 179 यात्री और 11 crew सदस्य बंधक बन गए।

7 दिनों की जद्दोजहद के बाद आखिरकार India ने तीन खतरनाक आतंकवादियों को रिहा करने का फैसला किया। 31 दिसंबर 1999 को, नए साल की पूर्व संध्या पर, विदेश मंत्री जसवंत सिंह खुद तीन आतंकियों को लेकर कंधार गए।

IC-814 कंधार अपहरण 1999 जसवंत सिंह विदेश मंत्री


अपनी autobiography "A Call to Honour" में उन्होंने लिखा: जब वे कंधार के लिए उड़ान में थे तो उन्हें खुद नहीं पता था कि इस mission को क्या नाम दें: "एक बचाव मिशन, एक समझौते की उड़ान, या भविष्य की ओर उड़ान?"

इस फैसले के लिए उन्हें media और विपक्ष की भारी आलोचना झेलनी पड़ी। तत्कालीन IB chief Ajit Doval ने बाद में इसे diplomatic failure बताया। यह विवाद आज भी जिंदा है और Netflix series "IC 814: The Kandahar Hijack" (2024) में पंकज कपूर ने जसवंत सिंह पर आधारित character निभाया।

लेकिन जसवंत सिंह ने इस criticism से कभी विचलित नहीं हुए। उनका कहना था: "मुझे अपने सभी नागरिकों को सुरक्षित वापस लाना था। अगर इसके लिए Taliban से बात करनी पड़ी, तो मुझे कोई संकोच नहीं।"


2009 का जिन्ना विवाद और BJP से निष्कासन

अगस्त 2009 में जसवंत सिंह की किताब "Jinnah: India-Partition-Independence" प्रकाशित हुई।

इस किताब में उन्होंने Muhammad Ali Jinnah को एक secular नेता के रूप में describe किया और भारत के विभाजन के लिए Jawaharlal Nehru की centralized नीति को जिम्मेदार बताया।

किताब के release होते ही BJP में तूफान आ गया। 19 अगस्त 2009 को पार्टी ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया।

हालांकि, 2010 में उन्हें पार्टी में वापस ले लिया गया।


2012 उपराष्ट्रपति चुनाव

2012 में जसवंत सिंह NDA के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बने। लेकिन UPA के उम्मीदवार Mohammad Hamid Ansari से वे चुनाव हार गए।


2014 चुनाव और अंतिम निष्कासन

2014 के Lok Sabha चुनाव में जसवंत सिंह अपनी परंपरागत बाड़मेर-जैसलमेर सीट से ticket चाहते थे। लेकिन पार्टी ने उन्हें ticket नहीं दी। Wikipedia के अनुसार, वसुंधरा राजे की आपत्ति के कारण यह ticket नहीं मिली।

इस पर जसवंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।

29 मार्च 2014 को BJP ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।

चुनाव में वे BJP प्रत्याशी कर्नल सोनाराम चौधरी से हार गए।


जीवन के अंतिम वर्ष और निधन

7 अगस्त 2014 को जसवंत सिंह अपने घर में वॉशरूम में फिसल गए और उन्हें गंभीर सिर की चोट आई। इसके बाद से उनका स्वास्थ्य कभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ।

जून 2020 में उन्हें दिल्ली के Army Hospital Research and Referral में भर्ती कराया गया। वे Sepsis with Multi-Organ Dysfunction Syndrome से पीड़ित थे, साथ ही 2014 की सिर की चोट का असर भी था।

27 सितंबर 2020 की सुबह 6:55 बजे, उन्हें cardiac arrest आया और 82 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

Army Hospital Research and Referral ने official statement में कहा: "It is with profound grief that we inform you about the sad demise of Hon'ble Major Jaswant Singh (Retd), former Cabinet Minister of Government of India."

PM Narendra Modi ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि "जसवंत सिंह जी ने BJP को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई।"


जसवंत सिंह की पुस्तकें

जसवंत सिंह एक prolific लेखक भी थे। उनकी प्रमुख किताबें:

A Call to Honour: In Service of Emergent India (2006): उनकी autobiography जो 1998 परमाणु परीक्षण, IC-814 hijacking और Kargil War में उनकी भूमिका का insider account है।

Jinnah: India-Partition-Independence (2009): जिस किताब ने उन्हें BJP से निष्कासित करवाया। भारत के विभाजन पर एक controversial लेकिन deeply researched perspective।


जसवंत सिंह जिन्ना किताब BJP निष्कासन 2009


Mayne's Hindu Laws: इस legal compendium के वे co-author थे।


जसवंत सिंह की विशेषताएं जो उन्हें अलग बनाती थीं

खुद को "Liberal Democrat" कहने वाले जसवंत सिंह BJP में रहते हुए भी हिंदुत्व की rigid राजनीति से दूरी बनाए रखते थे।

उन पर जीवनभर किसी भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा, जो आज की राजनीति में दुर्लभ है।

वे Pakistan से संबंध सुधारने के पक्षधर थे, जो कई बार उन्हें अपनी ही पार्टी में विवादों में डालता था।

किताबें लिखने की उनकी आदत उन्हें अन्य राजनेताओं से अलग करती थी।


FAQ Section

Q1. जसवंत सिंह का निधन कब और कैसे हुआ? जसवंत सिंह का निधन 27 सितंबर 2020 को सुबह 6:55 बजे cardiac arrest से हुआ। वे दिल्ली के Army Hospital Research and Referral में भर्ती थे जहां उन्हें Sepsis और Multi-Organ Dysfunction का इलाज चल रहा था। 2014 में उनके घर में गिरने से लगी सिर की चोट का असर भी था। वे 82 वर्ष के थे।

Q2. जसवंत सिंह को BJP से क्यों निकाला गया था? दो बार निकाला गया। पहली बार 2009 में उनकी किताब "Jinnah: India-Partition-Independence" के कारण, जिसमें उन्होंने जिन्ना को secular बताया और विभाजन के लिए नेहरू को जिम्मेदार ठहराया। 2010 में वापस लिए गए। दूसरी बार 2014 में जब उन्होंने पार्टी ticket न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा, तब उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित किया गया।

Q3. IC-814 कंधार में जसवंत सिंह की क्या भूमिका थी? 1999 में IC-814 hijacking के दौरान जसवंत सिंह विदेश मंत्री थे। 31 दिसंबर 1999 को वे स्वयं तीन आतंकवादियों को लेकर कंधार गए और यात्रियों की रिहाई सुनिश्चित की। इस फैसले पर उन्हें भारी आलोचना झेलनी पड़ी लेकिन उनका कहना था कि नागरिकों की जान बचाना उनकी पहली प्राथमिकता थी।

Q4. जसवंत सिंह को 'वाजपेयी का हनुमान' क्यों कहते थे? अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे विश्वसनीय सहयोगियों में से एक होने के कारण उन्हें यह उपनाम मिला। वाजपेयी सरकार में उन्होंने विदेश, रक्षा और वित्त तीनों मंत्रालय संभाले। हर कठिन कूटनीतिक मोर्चे पर वे वाजपेयी के साथ खड़े रहे।

Q5. जसवंत सिंह ने कौन से मंत्रालय संभाले? वाजपेयी सरकार में: 1996 में Finance Minister, 1998-2002 में External Affairs Minister, 2000-2001 में Defence Minister, 2002-2004 में Finance Minister। वे राजस्थान के एकमात्र नेता हैं जिन्होंने तीनों प्रमुख मंत्रालय संभाले।

Q6. Singh-Talbott Talks क्या थी? 1998 के Pokhran-II परमाणु परीक्षण के बाद America ने India पर प्रतिबंध लगाए। जसवंत सिंह ने US Deputy Secretary of State Strobe Talbott के साथ एक लंबी diplomatic dialogue शुरू की जिसे Singh-Talbott Talks कहा जाता है। इसी से धीरे-धीरे India-US संबंध सामान्य हुए और 2000 में Clinton ने India का दौरा किया।

Q7. जसवंत सिंह की प्रमुख किताबें कौन सी हैं? उनकी दो सबसे प्रसिद्ध किताबें हैं: "A Call to Honour: In Service of Emergent India" (2006), जो उनकी autobiography है, और "Jinnah: India-Partition-Independence" (2009), जो विभाजन पर एक controversial perspective है।

Q8. UPSC के लिए जसवंत सिंह के बारे में क्या जानना जरूरी है? UPSC की दृष्टि से: Singh-Talbott Talks (1998-99), IC-814 Kandahar hijacking (1999) में विदेश मंत्री की भूमिका, 2012 उपराष्ट्रपति चुनाव में NDA उम्मीदवार, Outstanding Parliamentarian Award (2001), Lahore Bus Yatra में भूमिका और Rajasthan के पहले नेता जिन्होंने तीनों प्रमुख मंत्रालय संभाले।


निष्कर्ष

जसवंत सिंह का जीवन इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में व्यक्ति अपने सिद्धांतों पर अडिग रहकर भी एक बड़ा कद बना सकता है। वे कभी भी एक stereotype में नहीं बंधे: न BJP के कट्टर ideologue बने, न अपनी diplomatic जिम्मेदारियों से पीछे हटे।

Kandahar का वह 31 दिसंबर 1999 का flight हो, या जिन्ना पर लिखी विवादास्पद किताब, या 2014 में पार्टी के खिलाफ जाकर निर्दलीय लड़ना, जसवंत सिंह ने हर बार अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी। यही उन्हें भारतीय राजनीति के उन विरले व्यक्तित्वों में रखता है जिन्हें इतिहास भुला नहीं सकता।


स्रोत / References: Wikipedia (Jaswant Singh), The Print (obituary article), Kids Kiddle (biography), Deccan Herald (death report), ThePrint IC-814 analysis, StarsUnfolded biography