The symptoms of covid Delta variant, do not ignore at all
हेल्थ

कोरोना डेल्टा वैरिएंट के ये हैं लक्षण, बिलकुल न करें नज़रअंदाज़

कोरोनावायरस ने भारत समेत दुनिया के लगभग सभी देशों को प्रभावित किया है। अमेरिका, ब्रिटेन, चीन जैसे बड़े-बड़े देश भी इस छोटे से वायरस के खतरनाक प्रभाव से बच नहीं सके। भारत देश में कोरोना ने काफी आतंक मचाया है। एक ओर अस्पताल में बेड की कमी और दूसरी ओर ऑक्सीजन की किल्लत होने से भारत के कई नागरिकों की जान चली गई और कई परिवारों ने अपनों को खो दिया। वहीं एक लहर के बाद कोरोना की दूसरी लहर ने भारत में काफी कहर मचाया है।

 

हालांकि अब इस दूसरी लहर का प्रभाव कम होता दिख रहा है और धीरे-धीरे संक्रमितों की संख्या भी कम होती जा रही है। परंतु स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में तीसरी लहर आने का प्रमुख कारण कोरोना वायरस का डेल्टा प्लस वेरिएंट हो सकता है। ऐसे में अब विश्व स्वास्थ संगठन भी यह मान चुका है कि डेल्टा प्लस वैरिएंट बेहद तेज गति से संक्रमण एक दूसरे में फैलाता है और यह रूप काफी खतरनाक साबित हो सकता है। इसके अलावा डेल्टा प्लस वेरिएंट के कई गंभीर लक्षणों के साथ-साथ सामान्य लक्षण भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा साझा किए गए हैं। जिनके बारे में सभी को जानना आवश्यक है। आइए जानते हैं डेल्टा प्लस वेरिएंट के बारे में।


क्या है डेल्टा प्लस वेरिएंट


कोरोना का डेल्टा प्लस वेरिएंट बेहद हानिकारक हो सकता है। यह डेल्टा प्लस वेरिएंट कोरोनावायरस का ही एक रूप है। कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट डेल्टा यानी कि B.1.617.2 के म्यूटेशन के कारण बना है। दरअसल कोरोना के इस नए रूप के बारे में सर्वप्रथम पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड बुलेटिन में एक लेख छपा था। विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना के इस नए रूप को डेल्टा प्लस (AY.1) नाम दिया गया है। दरअसल कहा जा रहा है कि डेल्टा प्लस वेरिएंट कोरोना का बहुत ही प्रभावी रूप है जोकि स्पाइक प्रोटीन में K417N म्यूटेशन यानी उत्परिवर्तन के कारण जुड़ जाने के बाद नए वेरिएंट में बदल गया है। यह नया रूप कोरोनावायरस से अधिक संक्रामक है। इस वजह से लोग काफी तेजी से संक्रमित हो सकते हैं।


डेल्टा प्लस वेरिएंट तेजी से करता है लोगों को संक्रमित


कोरोना का नया डेल्टा प्लस वेरिएंट काफी खतरनाक और प्रभावी बताया जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह वेरिएंट पहले कोरोनावायरस से 60% अधिक संक्रामक है तथा यह मनुष्यों के लिए सबसे अधिक घातक हो सकता है। इसके फैलने की गति काफी तेज है तथा यह वेरिएंट संक्रमित मनुष्य के फेफड़ों की कोशिकाओं से काफी मजबूती से चिपक जाता है। जिससे मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर होता है और वह मनुष्य धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है।


भारत के साथ-साथ अन्य देशों में भी पाए गए इस वेरिएंट के संक्रमित


भारत जैसे बड़े देश में कोरोनावायरस लगभग सभी वेरिएंट्स के संक्रमित पाए जा चुके हैं। अब डेल्टा प्लस वेरिएंट के भारत में कुल 48 केस रजिस्टर किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक महाराष्ट्र राज्य में 20 लोग संक्रमित पाए गए हैं। इसके अलावा तमिलनाडु में 9, केरला में 3,  मध्यप्रदेश में 7 तथा पंजाब और गुजरात में 2-2 केस मिले हैं। बात की जाए आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, कर्नाटक और जम्मू कश्मीर की तो यहां पर डेल्टा प्लस वेरिएंट के 1-1 केस दर्ज किए गए हैं। भारत देश के अलावा इस वेरिएंट ने दुनिया के अन्य देशों को भी संक्रमित किया है। इनमें यूएस, स्विट्ज़रलैंड, नेपाल, पोलैंड, जापान, पुर्तगाल, रूस तथा चीन भी शामिल है।


सबसे पहले यहां मिला था डेल्टा प्लस वेरिएंट


टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के अनुसार डेल्टा प्लस वेरिएंट सर्वप्रथम मार्च में यूरोप में मिला था। उस समय से ही वैज्ञानिकों ने इस वेरिएंट पर नजर रखी है। दरअसल एक जानकारी के मुताबिक इनफ्लुएंजा वायरस के जीनोमिक डेटा एकत्रित करने वाली एक संस्था GISAIN ने सबसे पहले यह पता किया था कि K 417N स्पाइक प्रोटीन के साथ म्यूटेंट के डेल्टा प्लस वेरिएंट के 63 जीनोम उपस्थित हैं। इस खबर को 7 जून को पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड की रिपोर्ट में प्रकाशित किया गया था। इसके अलावा दिल्ली के इंस्टीट्यूट आफ जिनोमिक्स एवं इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के क्लीनिकल तथा कंप्यूटेशनल बायोलॉजिस्ट द्वारा बताया गया कि K417N म्यूटेशन बीटा या B.1.351 वेरिएंट में भी मिला है और तभी से यह वेरिएंट वैज्ञानिकों के लिए काफी चिंता का विषय बना हुआ है।


डेल्टा प्लस वेरिएंट के सामान्य लक्षण


  • स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेल्टा प्लस वेरिएंट के गंभीर, सामान्य और कम लक्षणों की एक सूची तैयार की गई है।
  • सूखी खांसी होना डेल्टा प्लस वेरिएंट के सामान्य लक्षणों में शामिल है।
  • यदि किसी को बुखार आता है तो यह भी इस वैरिएंट के सामान्य लक्षणों में गिना जाता है।
  • इसके अलावा थकान महसूस होना, सिर दर्द और लूज मोशन की समस्या आना, गली में हल्की-हल्की खरास होना डेल्टा प्लस वेरिएंट के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं। इनसे बचना चाहिए।


डेल्टा प्लस वेरिएंट के सामान्य से अधिक लक्षण


सामान्य से अधिक लक्षणों में दर्द होना, पैर की उंगलियों का रंग बदलना, इसके अलावा स्वाद और गंध का चले जाना तथा त्वचा पर चकत्ते होना जैसे लक्षण शामिल हैं। इसमें तेज सिर दर्द तथा लगातार खांसी होना भी शामिल है।


डेल्टा प्लस वेरिएंट के गंभीर लक्षण


कोरोना के इस वेरिएंट के गंभीर लक्षणों में सीने में तेज दर्द उठना, सांस लेने में काफी अधिक दिक्कत महसूस करना, बोलने में किसी भी तरह की परेशानी होना तथा सांस फूलना जैसे लक्षण शामिल हैं।

 

इस प्रकार के सभी लक्षणों से बचकर रहने में ही समझदारी है। यदि इस प्रकार के कोई भी लक्षण आपको दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है। क्योंकि ये वेरिएंट काफी तेजी से एक दूसरे में फैलता है। इस कारण इसका जल्द से जल्द इलाज होना भी आवश्यक है।


इस तरह से करें बचाव


  • कोरोना के विभिन्न रूपों से बचने के लिए विभिन्न तरह के तरीके अपनाने आवश्यक हैं। 
  • जब भी आप घर से बाहर जाएं तो डबल मास्क जरूर पहनें।
  • इसके अलावा घर से बाहर जाने पर सेनिटाइजर का उपयोग आवश्यक रूप से करें।
  • जब भी कोई आवश्यक कार्य हो तभी घर से बाहर निकलें। इसके अलावा अपने सारे कार्य घर से ही करें। 
  • घर से बाहर जाने पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अवश्य करें।
  • जब भी आप बाहर से घर आएं तो 20 सैकेंड तक अपने हाथ अच्छे से धोएं।
  • बाहर से कोई भी सामान यदि लाया जा रहा हो तो इसे डिसइनफेक्ट करके ही प्रयोग करें।

इस तरह से इन सभी बचाव के तरीकों को अपनाकर आप स्वयं तथा अपने परिवार को कोरोनावायरस के भयंकर प्रकोप से बचा कर रख सकते हैं। इसके अलावा वैक्सीनेशन अवश्य करवाएं। भले ही यह कोरोना को दूर ना करे परंतु इससे पड़ने वाले अधिक हानिकारक प्रभावों को रोकने में यह काफी सहायता करता है।


क्या वैक्सीन डेल्टा प्लस वेरिएंट पर है प्रभावी


यह सवाल सभी के मन में उठता है कि क्या भारत में बनाई हुई वैक्सीन डेल्टा प्लस वेरिएंट पर प्रभावी है अथवा नहीं।

 

इसके जवाब में भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोविशील्ड तथा कोवैक्सीन कोविड-19 और इसके अल्फा, बीटा, गामा तथा डेल्टा जैसे सभी वेरिएंट्स पर अपना प्रभाव प्रकट करती है। इसके अलावा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में किए गई एक स्टडी बताती है कि एस्ट्रोजेनिका तथा फाइजर सामूहिक रूप से बनी हुई कोविड-19 वैक्सीन हैं और ये वैक्सीन कोरोना की डेल्टा तथा कप्पा वेरिएंट के खिलाफ भी अपना प्रभाव दिखाती है। इस तरह से देखा जाए तो वैक्सीन सुरक्षित है और सभी को इसका लाभ अवश्य लेना चाहिए।