इस लेख में जानेंगे कि कुंभ मेले के बाद नागा साधु कहाँ चले जाते हैं, हिमालय की गुफाओं में कैसे रहते हैं, क्या खाते हैं, नागा साधु कैसे बनते हैं, और इनके अखाड़ों की व्यवस्था कैसी होती है। और पढ़ें
कुंभ की दिव्यता का दर्शन कराने में अखाड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। कुंभ और अखाड़ों को एक दूसरे का पर्याय भी माना जाता है। अखाड़े कुंभ को भव्यता के साथ -साथ संपूर्णता प्रदान करते हैं। व्यवहारिक रूप से कुंभ का शुभारंभ अखाड़ों के कुंभ नगर में प्रवेश करने के साथ ही माना जाता है। और पढ़ें
कुम्भ मेले में आज तीसरा शाही स्नान हो रहा है। 11 वर्षों बाद आया कुम्भ मेला वैसे तो हर 12 सालों में एक बार आता है परन्तु इस बार मेले का आयोजन 11 सालों के बाद ही आया है। जानते हैं की महायोग क्या है और इसका कुम्भ मेले के 11 सालों से क्या सम्बन्ध है, यह भी जानते हैं कि आज के स्नान का क्या समय सारिणी है और पढ़ें
कुम्भ मेला मुख्य रूप से शाही स्नान के लिए ही जाना जाता है, मुख्यतः इस मेले में शाही स्नान का ही महत्व है। आज सोमवती अमावस्या है और इस अवसर पर साधुओं के द्वारा गंगा जी में लगायी गयी डुबकी का अलग ही फल मिलता है। साधू संतों के शाही स्नान के बाद आम लोग भी इस बेला पर स्नान का लाभ लेते हैं और पढ़ें