You can Link Your Aadhar with EPF by 1st September
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PF खाताधारकों को आधार कार्ड से लिंक करने को मिली 1 सितंबर तक की मोहलत

पीएफ खाताधारकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आयी है। बता दें कि ईपीएफओ द्वारा पीएफ खाताधारकों के UAN को उनके आधार कार्ड से लिंक करवाने की अंतिम तारीख पहले 1 जून तय की गई थी परंतु अब ईपीएफओ द्वारा इस UAN को आधार नंबर के साथ लिंक तथा वेरीफाई करने के साथ-साथ पीएफ रिटर्न दाखिल करने के लिए 1 सितंबर तक का वक्त दे दिया है। यदि पीएफ खाताधारकों द्वारा UAN को आधार से लिंक नहीं किया गया तो इसके लिए उन्हें काफी बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है। इसके अलावा कर्मचारियों के कई ऐसे काम भी रुक सकते हैं जो कि आवश्यक रूप से पूरे होने चाहिए। इसमें पीएफ निकालने से लेकर अंशदान के जमा होने तक के सारे कार्य शामिल हो सकते हैं। इसलिए UAN को आधार कार्ड से लिंक करना काफी आवश्यक हो गया है। आइए जानते हैं कि यदि पीएफ खाते का UAN आधार कार्ड से लिंक नहीं होता है तो इसके क्या-क्या नुकसान एक कर्मचारी को झेलने पड़ सकते हैं।


इनकम टैक्स में नहीं मिलेगी राहत


एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि पीएफ अकाउंट का UAN किसी कर्मचारी द्वारा अपने आधार कार्ड से लिंक नहीं करवाया गया तो इस कारण कर्मचारी अपना अंशदान जमा नहीं कर पायेगा और यदि यह अंशदान जमा नहीं हुआ तो इस राशि को इनकम टैक्स में खर्च के रूप में स्वीकृत तथा उपयोगी नहीं माना जा सकता। यदि कोई कर्मचारी अपना पीएफ खाते का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर धारण नहीं करता है तो उसके पीएफ यानी कि प्रोविडेंट फंड से जुड़े हुए कोई भी काम नहीं हो पाएंगे। इसके लिए किसी भी रूप में UAN लेना अनिवार्य होगा।इन सभी कार्यों को करने के दौरान UAN को आधार से लिंक करवाना न भूलें।


बीमा योजना का भी नहीं मिलेगा लाभ


एक्सपर्ट्स के अनुसार यदि किसी कर्मचारी द्वारा UAN तथा आधार कार्ड को लिंक नहीं करवाया जाता है तो कंपनी कर्मचारी का पीएफ काट सकती है। परंतु उसे कंपनी की तरफ से योगदान नहीं मिलता है। इसका अर्थ ये हुआ कि कंपनी का योगदान केवल उन्हीं कर्मचारियों का प्रदान किया जाता है जिनके पीएफ खाते आधार से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा यदि किसी कर्मचारी द्वारा UAN आधार से लिंक नहीं करवाया जाता तो इन कर्मचारियों को EPFO के EDLI यानी कि इम्प्लॉय डिपॉज़िट लिंक्ड इन्श्योरेंस भी नहीं दिया जाता है। इसके चलते उस व्यक्ति को बीमा कवर से भी वंचित कर दिया जाता है।


EDLI योजना


EDLI स्कीम प्रोविडेंट फण्ड खाताधारकों को दिया जाने वाला बीमा कवर है। दरअसल सरकार द्वारा इम्प्लॉय डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम 1976 के अंतर्गत दी जाने वाली बीमा राशि की तय सीमा को बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दिया गया है। यह राशि हाल ही में हुए कोविड-19 महामारी की चिंता ग्रस्त स्थिति को देखते हुए लेबर मिनिस्ट्री द्वारा बढ़ाई गई है। इन्होंने डेथ इंश्योरेंस पर मिलने वाले लाभ की रकम में भी बढ़ोतरी की है। इसकी वजह से अब किसी भी पीएफ खाता धारक की मृत्यु पर भी कम से कम दी जाने वाली बीमा राशि को भी बढ़ाकर 2.5 लाख रुपए कर दिया गया है। इस तरह से इस बीमा राशि में ग्राहक की मृत्यु पर अधिकतम राशि 7 लाख रुपये देने का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। जबकि पहले इस बीमा में निम्नतम राशि 2 लाख रुपये और अधिकतम राशि 7 लाख रुपये दी जाती थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह बीमा राशि खाताधारक या उसके परिजनों को तब दी जाती है जब उसकी मृत्यु हो जाती है या वह किसी अनहोनी का शिकार हो जाता है।


फर्जी कर्मचारियों को पकड़ने में होगी आसानी


दरअसल इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा जारी पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करवाने की प्रक्रिया अभी भी चल रही है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जिससे किसी भी तरह की फर्जी व्यक्तियों की पहचान की जा सकती है। अब एक ऐसी ही प्रक्रिया सरकार द्वारा पीएफ विभाग में भी चलाई गई है। नतीजतन जो भी व्यक्ति नकली या झूठे कर्मचारियों को अपनी कंपनी अथवा संस्थान में कार्यरत दिखाते थे वे अब पहचाने जा सकेंगे। इसके अलावा अब बिना आधार लिंक करवाए कोई भी खाताधारक अपना पुराना पीएफ भी नहीं निकाल पाएगा। इससे फर्जी कर्मचारियों को पहचानने में काफी आसानी होगी और इनकम टैक्स विभाग का काम काफी सरलता से हो जाएगा। इनकम टैक्स की चोरी और फर्जी रूप से कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए यह प्रक्रिया एक बड़ा झटका साबित हुई है। अतः जल्द से जल्द अपने पीएफ अकाउंट के UAN से आधार कार्ड को लिंक करवाएं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी प्रकार इन्वेस्टमेंट करने से पहले आप अपने एडवाइजर से अवश्य परामर्श लें या उस से सम्बंधित दश्तावेज़ों का अध्यन अवश्य करें। हम आपके किसी भी फायदा या नुक्सान के लिए जिम्मेदार नहीं माने जायेंगे।