Kumbh Mela in 12 Years
कुम्भ 2021

जानिये आखिर क्यों हर 12 साल में होता हैं महाकुम्भ

हिंदू आस्था का सबसे पवित्र मेला 'कुंभ मेला' का आयोजन हरिद्वार में किया जा रहा है। यह पर्व हर 12 वर्ष के अंतराल पर चार स्थानों पर लगता है, इन चार स्थानों में 12 वर्ष के बाद कुंभ मेला लगता है जिसमें देश विदेशों से लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं।


भारत के चार पवित्र कुंभ मेले के स्थानों में से एक स्थान हरिद्वार में कुंभ मेले की शुरुआत हो चुकी है। लगभग 83 साल बाद यहां 12 वर्ष की जगह 11 वर्ष के बाद ही कुंभ मेले का आयोजन किया गया। कुंभ मेला हिंदू धर्म के किसी भी त्योहारों में से सबसे बड़ा त्यौहार है जिसमें लाखों करोड़ों भक्तों का एक साथ मिलना होता है। प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल पर हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा, नासिक में गोदावरी तो वहीं त्रिवेणी संगम प्रयागराज में कुंभ मेला का आयोजन किया जाता है। तो आपने कभी गौर किया कि आखिर 12 वर्ष के अंतराल पर ही कुंभ मेला क्यों लगता है? आइए जानते हैं कुंभ मेले से जुड़े इस रहस्य को.....


12 वर्ष में कुंभ मेला (Kumbh Mela in Every 12 Years)


प्रत्येक 12 वर्ष के बाद पूर्ण कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है इसके अलावा 6 साल में अर्ध कुंभ मेला भी लगता है। कुंभ का अर्थ होता है कलश। ज्योतिष शास्त्र में कुंभ राशि का चिन्ह कलश ही है। कुंभ मेले के पौराणिक मान्यता समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है जिसमें कहा गया कि देवताओं और राक्षसों ने समुद्र से प्रकट होने वाले रत्नों को आपस में बांटने के लिए समुद्र मंथन किया। इस मंथन से समुद्र से सबसे मूल्यवान रत्न अमृत के रूप में प्राप्त हुआ, जिसे पाने के लिए देवताओं और दानवों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। 

देवताओं और दानवों के बीच हो रहे संघर्ष के कारण भगवान विष्णु ने अमृत को बचाने के लिए वह कलश अपने वाहन गरुड़ को दे दिया। असुरों ने गरुड़ से वह कलश छीनने का प्रयास किया, इस छीना झपटी में अमृत की कुछ बूंदें छलक कर हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन में गिरी, जहां आज पवित्र कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। देवताओं और असुरों में सुधा कुंभ को लेकर यह संघर्ष 12 दिन तक 12 स्थानों पर चला और 12 स्थलों में सुधा कुंभ से अमृत की बूंदें छलकी, जिनमें से चार स्थान पृथ्वी पर तो अन्य 8 स्थान स्वर्ग लोक पर माने जाते हैं। देवताओं के 12 दिन का संघर्ष पृथ्वी वासियों के लिए 12 वर्ष के बराबर होता है जिस कारण प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल पर कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है।


महाकुंभ का आयोजन (Celebration of Mahakumbh)


ज्योतिष शास्त्र व अन्य पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं का एक दिन पृथ्वी वासियों के लिए एक साल के बराबर होता है। देवताओं और दानवों के बीच 12 दिन तक अमृत कलश को लेकर संघर्ष हुआ जिस कारण प्रति 12 वर्ष में कुंभ मेला लगता है। देवताओं के 12 साल पृथ्वी के 144 साल के बराबर होते हैं इसलिए ऐसी मान्यता है कि 144 साल बाद स्वर्ग में कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है जबकि पृथ्वी पर 144 वर्ष के अंतराल पर महाकुंभ का आयोजन किया जाता है।

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